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एक कमरा

यह छोटी सी एक कविता एक औरत के दिल की बात है जिसे वो कुछ पंक्तियों के माध्यम से आप सभी तक पहुंचाना चाहती है, इस कविता में एक स्त्री शादी के बाद उस कमरे में प्रवेश करना चाहती है जो आजीवन उसका अपना कमरा कहलाए, वो उस कमरे में अपने शादी के बाद के हर उस क्षण को संजोकर रखना चाहती है जो वो अपनी इस नई जिंदगी में जीएगी, लेकिन एक दिन बिना उसकी अनुमति के उस कमरे से सामान बाहर गेस्ट रूम में रख दिया जाता है और उसके कमरे जो कभी उसका अपना कमरा हुआ करता था उसे गेस्ट room बना दिया जाता है , वो इस कविता के माध्यम से अपना दर्द बताना चाहती है की कभी कभी कमरा, कमरा नहीं रह जाता   अगर ये कविता आपको पसंद आती है तो इसे जरूर like और share करे, । 









"वो कमरा सिर्फ़ एक कमरा नहीं था"

तुम्हारे लिए शायद


वो बस घर का एक कमरा था।


चार दीवारें,


एक छत,


एक दरवाज़ा,


और कुछ सामान।


पर मेरे लिए...


वो मेरी पूरी दुनिया था।


याद है मुझे,


जब शादी के बाद तुमने कहा था—


"चलो नैनीताल चलते हैं,


कुछ दिन वहीं रुकेंगे।"


पर मैंने मना कर दिया था।


क्योंकि मुझे किसी पहाड़,


किसी होटल,


किसी खूबसूरत जगह से ज़्यादा


तुम्हारे साथ उस कमरे में जाना था,


जिसे मैं अपना घर कह सकूँ।


मैंने सोचा था,


मेरी नई ज़िंदगी की पहली सुबह


उसी कमरे से शुरू होगी।


मेरे सारे सपने,


मेरी सारी उम्मीदें,


मेरे सारे आने वाले कल


उसी कमरे की दीवारों पर टंगे रहेंगे।


उस कमरे में सिर्फ़ सामान नहीं था,


उसमें मेरी हँसी थी,


मेरी शर्म थी,


मेरे नए रिश्ते की धड़कन थी।


वहीं मैंने पत्नी बनना सीखा,


वहीं मैंने माँ बनने के सपने देखे,


वहीं मेरी गोद में मेरी बच्ची आई।


उस कमरे का हर कोना


मेरी कहानी जानता था।


दीवारें जानती थीं


मैं कब हँसी थी,


कब रोई थी,


कब रात भर जागी थी,


और कब चुपचाप तकिए में मुँह छुपाकर सो गई थी।


फिर एक दिन...


मैं घर पर नहीं थी।


और मेरे लौटने से पहले ही


मेरी पूरी दुनिया बदल दी गई।


मेरा सामान हटा दिया गया।


मेरी अलमारी खाली कर दी गई।


मेरी मौजूदगी के निशान


किसी और कमरे में भेज दिए गए।


शायद किसी के लिए


ये बस सामान इधर से उधर करना था।


पर मेरे लिए...


ऐसा लगा जैसे


किसी ने मेरी यादों को


घर से बेघर कर दिया हो।


उस दिन पहली बार समझ आया


कि दर्द सिर्फ़ लोगों के छोड़ने से नहीं होता,


कभी-कभी जगहें भी छूट जाती हैं।


और कुछ जगहें ऐसी होती हैं


जो दिल के अंदर घर बना लेती हैं।


आज भी उस कमरे के सामने से गुजरती हूँ,


तो लगता है


जैसे मेरा कोई हिस्सा


अब भी वहीं बैठा है।


वहीं,


जहाँ एक नई दुल्हन


अपने नए जीवन के सपने बुन रही थी।


तुम्हारे लिए वो शायद


एक कमरा था...


पर मेरे लिए,


वो मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत अध्याय था।


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